Friday, 5 June 2020

धरती पर भगवान्


नमस्कार दोस्तों,
                    आप सभी को आज एक बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी देना चाहते हैं
जैसा की आप सभी को पता है आज कबीर साहेब जी का
623 वां कबीर प्रकट दिवस है
बड़ी खुशी की बात है कि परमात्मा कबीर साहेब जी प्रत्येक युग में अपने  वास्तविक निज लोक से चलकर इस काल लोक में आते हैं 
कबीर परमात्मा अच्छी आत्माओं को मिलते हैं। जो परमात्मा के दृढ़ भक्त होते हैं, उन पर परमात्मा का विशेष आकर्षण होता है। 
उदाहरण भी बताया है कि जैसे :- विद्युत अर्थात् आकाशीय बिजली स्नेह वाले स्थानों को आधार बनाकर गिरती है। जैसे कांशी धातु पर बिजली गिरती है, पहले कांशी धातु के कटोरे, गिलास-थाली, बेले आदि-आदि होते थे। वर्षा
के समय तुरन्त उठाकर घर के अन्दर रखा करते थे। वृद्ध कहते थे कि कांशी के बर्तन पर बिजली अमूमन गिरती है, इसी प्रकार परमात्मा अपने प्रिय भक्तों पर आकर्षित होकर मिलते हैं।
कबीर साहेब जी की अमृत वाणी है
कबीर,भक्ति बीज जो होय हंसा,
तारूं तास के एक्कोतर बंशा
"परमात्मा कबीर साहेब का कलयुग में अवतरण"
कलयुग में कबीर परमेश्वर अपने वास्तविक नाम कबीर रूप में काशी नगरी में लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर अवतरित हुए।
कबीर परमात्मा सन् 1398, ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी को ब्रह्म मुहूर्त में अपने निज धाम सतलोक से चलकर आए और काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर शिशु रूप धारण करके विराजमान हुए। जहाँ से नीरू-नीमा नामक जुलाहा दम्पति उन्हें उठा कर ले गये और पुत्रवत् पालन किया।

  कबीर साहेब जी कहते हैं :-
      कबीर, ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।
केवल कबीर परमेश्वर जी ही हैं जिनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ
गरीबदास जी महाराज ने भी अपनी वाणी के द्वारा इसका चित्रण किया है:-
न सतगरु जननी जने, उनके मां न बाप।
पिंड ब्रह्मंड से अगम है, जहां न तीनों ताप।।
  जब  शिशु रूप में कबीर परमेश्वर  को नीरू नीमा  घर पर लाए तो उनको देखने के लिए पूरी काशी के लोग उमड़ उमड़ कर आ रहे थे। ऐसा अद्भुत बच्चा उन्होंने आज तक नहीं देखा था। बच्चे का शरीर सफेद बर्फ की तरह चमक रहा था। बालक को देखने के लिए ऊपर से सूक्ष्म रूप में देवता भी आए।
गरीब, गोद लिया मुख चूम करि, हेम रूप झलकंत।
जगर मगर काया करै, दमकै पदम् अनंत।।
गरीब,काशी उमटी गुल भया,मोमन का घर घेर
कोई कहे ब्रह्मा विष्णु है कोई कहे जगदीश

कबीर साहेब को जब नीरू नीमा घर लाए तो काशी के लोग बालक को देखने उमड़ पड़े। कबीर जी का तेज इतना था कि कोई उन्हें देवता स्वरूप कह रहा था कोई ईश्वर स्वरूप कह रहा था। सब परमात्मा का रूप देखकर उन पर मोहित हो रहे थे।
हमारे वेद भी प्रमाणित करते हैं कि पूर्ण परमात्मा ऐसी लीला करता हुआ ही पृथ्वीलोक पर आता है।
👉🏻ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9
परमात्मा शिशु रूप में प्रकट होकर लीला करता है। तब उनकी परवरिश कंवारी गायों के दूध से होती है।
👉🏻ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17
पूर्ण परमात्मा कविर्देव शिशु रूप धारण करके लीला करते हैं। कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी प्राप्त करते हैं। 
इन सब बातों से स्पष्ट होता है सर्व सृष्टि के सृजनहार कबीर परमेश्वर ही हैं।
वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज ही हैं जो सही भक्ति विधि बताते हैं
जिससे मुक्ति धाम सतलोक की प्राप्ति हो जाती है। उन्हें समय रहते पहचान लो।
देखिए
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साधना Tv 7 :30 pm से


Wednesday, 3 June 2020

Eternal place

भक्त समाज ऐसे भगवान् की तलाश में है,जो उन्हें सर्व सुख प्रदान कर सके परन्तु अफसोस! इस बात का है कि हमें आज तक ऐसा भगवान् नहीं मिला।
सभी अलग-अलग भगवानों को पूजते हैं ,वास्तव में वो भगवान् अविनाशी नहीं हैं वो जन्म -मृत्यु में हैंऔर हमें मोक्ष नहीं प्रदान कर सकते। 
फिर वो अविनाशी परमात्मा कौन है ? जो मोक्ष दायक है।
और एक सवाल यह भी उठता है मन में कि जब सभी एक ही परमात्मा के बच्चे हैं चाहे वह आज हिंदू हैं ,चाहे मुस्लिम है ,चाहे सिक्ख है ,चाहे ईसाई है वह अपने हिसाब से 
अलग-अलग भगवानों की भक्ति क्यों करते हैं ।
आइए हम जानते हैं हमारे पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब के बारे में जो सतलोक में विराजमान है जहां हम पहले रहा करते थे और अपनी गलती के कारण इस काल लोक के कुएं में आकर फंस गए ।
                              " सतलोक"
                 Satlok is real heaven.



सतलोक, हमारा अपना घर, जहाँ जाकर नैष्कर्मय मुक्ति  (बिना काम किए सब कुछ मिल जाता है) प्राप्त होती है।
अब हम उन संतो की बात करते हैं जिन्हें कबीर परमात्मा ने सतलोक दिखाया,उनमें से एक है आदरणीय धर्मदास जी ।
धर्मदास जी बान्धवगढ M.P के रहने वाले थे ,विष्णु उपासक थे,अड़सठ तीर्थ भ्रमण करते थे,एकादशी का व्रत करते थे ।
फिर उन्हें कबीर परमात्मा जिंदा महात्मा के रूप में और उन्हें सच्चा ज्ञान बताया, सच्चे मोक्ष मंत्र प्रदान किए और सतलोक दिखाया फिर उन्हें दृढ़ विश्वास हुआ कि कबीर साहिब ही वास्तव में पूर्ण परमात्मा है।
कबीर परमात्मा धर्मदास जी को समझाते हैं: -
धर्मदास यह जग बौराना कोई ना जाने पद निरवाना।
यही कारण मैं कथा पसारा, जग से कहिए एक राम न्यारा।
राम -राम सब जगत बखाने, आदि राम कोई बिरला ही जाने। 
धर्मदास जी द्वारा आंखों देखा सतलोक का वर्णन: -
जहाँ तक दृष्टि गई, धर्मदास जी ने देखा कि प्रकाश झलक रहा था। परमेश्वर (सत्य पुरूष) के दरबार के द्वार पर एक द्वारपाल (सन्तरी) खड़ा था। उसको जिन्दा रूप
में नीचे से गए प्रभु ने कहा कि यह भक्त परमेश्वर जी के दर्शन करने मृतलोक से आया
है, इसको प्रभु के दर्शन कराओ। जिन्दा वेशधारी परमेश्वर बाहर ही बैठ गए  और द्वारपाल ने एक अन्य हंस (सत्यलोक में भक्त को हंस तथा भक्तमती को हंसनी कहते हैं) से कहा कि
आप इस भक्त को सत्यपुरूष के दर्शन कराओ। जब वह हंस धर्मदास जी को दर्शन के लिए
लेकर चला तो बहुत सारे हंस आ गए और धर्मदास जी का स्वागत करते हुए नाचते हुए
आगे-आगे चले। उनका शरीर विशाल था, गले में रत्नों की माला थी। उनके नाक, मुख,
गर्दन की शोभा अनोखी थी। सोलह सूर्यों जितना शरीर का प्रकाश था। उनके रोम (शरीर
के बाल) की चमक रत्न (हीरे) जितनी थी। उनका शरीर अमर (अविनाशी) है। सब मिलकर
पुरूष दरबार में गए। सत्यपुरूष जी सिंहासन पर बैठे थे। उनके एक रोम का प्रकाश करोड़
चन्द्रमाओं तथा सूर्यों जितना था। धर्मदास जी ने देखा कि ये तो वही चेहरा है जो नीचे जिन्दा
बाबा के वेश में मिले थे तथा मुझे यहाँ लेकर आए हैं। धर्मदास जी बहुत लज्जित हुए और
विचार करने लगे कि नीचे मुझे विश्वास नहीं हुआ कि यह जिन्दा ही परमेश्वर हैं।
कबीर परमात्मा पृथ्वी पर आकर साधारण मनुष्य की तरह भी लीला कर जाते हैं और किसी को आभास तक नहीं होता कि यह भगवान् है (असंख्य ब्रह्मांडो का स्वामी ) ।

Tuesday, 2 June 2020

Divine play of God kabir

नमस्कार दोस्तों, 
                      मै surbhi arora आप सभी को मनुष्य जीवन की अहमियत के बारे में बताना चाहूंगी,क्योंकि मनुष्य जीवन 84 लाख योनियों में जाने के बाद प्राप्त होता है और अगर इस मनुष्य जीवन में सच्चे संत से सच्चा नाम लेकर भक्ति नहीं की तो फिर यह अनमोल मनुष्य जीवन व्यर्थ चला जाएगा।
आओ हम हमारे पूर्ण परमात्मा जो असंख्य ब्रह्मांडो के स्वामी हैं उनकी लीलाओं के बारे में जानते हैं ।


तेरह गाड़ी कागजों को लिखना
एक समय दिल्ली के बादशाह ने कहा कि कबीर जी 13(तेरह) गाड़ी कागजों को ढ़ाई
दिन यानि 60 घण्टे में लिख दे तो मैं उनको परमात्मा मान जाऊँगा। परमेश्वर कबीर जी
ने अपनी डण्डी उन तेरह गाडि़यों में रखे कागजों पर घुमा दी। उसी समय सर्व कागजों
में अमृतवाणी सम्पूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान लिख दिया। राजा को विश्वास हो गया।

धरती पर भगवान्

नमस्कार दोस्तों,                     आप सभी को आज एक बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी देना चाहते हैं जैसा की आप सभी को पता है आज कबीर साहेब...