नमस्कार दोस्तों,
आप सभी को आज एक बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी देना चाहते हैं
जैसा की आप सभी को पता है आज कबीर साहेब जी का
623 वां कबीर प्रकट दिवस है
बड़ी खुशी की बात है कि परमात्मा कबीर साहेब जी प्रत्येक युग में अपने वास्तविक निज लोक से चलकर इस काल लोक में आते हैं
कबीर परमात्मा अच्छी आत्माओं को मिलते हैं। जो परमात्मा के दृढ़ भक्त होते हैं, उन पर परमात्मा का विशेष आकर्षण होता है।
आप सभी को आज एक बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी देना चाहते हैं
जैसा की आप सभी को पता है आज कबीर साहेब जी का
623 वां कबीर प्रकट दिवस है
बड़ी खुशी की बात है कि परमात्मा कबीर साहेब जी प्रत्येक युग में अपने वास्तविक निज लोक से चलकर इस काल लोक में आते हैं
कबीर परमात्मा अच्छी आत्माओं को मिलते हैं। जो परमात्मा के दृढ़ भक्त होते हैं, उन पर परमात्मा का विशेष आकर्षण होता है।
उदाहरण भी बताया है कि जैसे :- विद्युत अर्थात् आकाशीय बिजली स्नेह वाले स्थानों को आधार बनाकर गिरती है। जैसे कांशी धातु पर बिजली गिरती है, पहले कांशी धातु के कटोरे, गिलास-थाली, बेले आदि-आदि होते थे। वर्षा
के समय तुरन्त उठाकर घर के अन्दर रखा करते थे। वृद्ध कहते थे कि कांशी के बर्तन पर बिजली अमूमन गिरती है, इसी प्रकार परमात्मा अपने प्रिय भक्तों पर आकर्षित होकर मिलते हैं।
कबीर साहेब जी की अमृत वाणी है
कबीर,भक्ति बीज जो होय हंसा,
तारूं तास के एक्कोतर बंशा
के समय तुरन्त उठाकर घर के अन्दर रखा करते थे। वृद्ध कहते थे कि कांशी के बर्तन पर बिजली अमूमन गिरती है, इसी प्रकार परमात्मा अपने प्रिय भक्तों पर आकर्षित होकर मिलते हैं।
कबीर साहेब जी की अमृत वाणी है
कबीर,भक्ति बीज जो होय हंसा,
तारूं तास के एक्कोतर बंशा
"परमात्मा कबीर साहेब का कलयुग में अवतरण"
कलयुग में कबीर परमेश्वर अपने वास्तविक नाम कबीर रूप में काशी नगरी में लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर अवतरित हुए।
कबीर परमात्मा सन् 1398, ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी को ब्रह्म मुहूर्त में अपने निज धाम सतलोक से चलकर आए और काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर शिशु रूप धारण करके विराजमान हुए। जहाँ से नीरू-नीमा नामक जुलाहा दम्पति उन्हें उठा कर ले गये और पुत्रवत् पालन किया।
कबीर साहेब जी कहते हैं :-
कबीर, ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।
केवल कबीर परमेश्वर जी ही हैं जिनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ
गरीबदास जी महाराज ने भी अपनी वाणी के द्वारा इसका चित्रण किया है:-
न सतगरु जननी जने, उनके मां न बाप।
पिंड ब्रह्मंड से अगम है, जहां न तीनों ताप।।
जब शिशु रूप में कबीर परमेश्वर को नीरू नीमा घर पर लाए तो उनको देखने के लिए पूरी काशी के लोग उमड़ उमड़ कर आ रहे थे। ऐसा अद्भुत बच्चा उन्होंने आज तक नहीं देखा था। बच्चे का शरीर सफेद बर्फ की तरह चमक रहा था। बालक को देखने के लिए ऊपर से सूक्ष्म रूप में देवता भी आए।
गरीब, गोद लिया मुख चूम करि, हेम रूप झलकंत।
जगर मगर काया करै, दमकै पदम् अनंत।।
गरीब,काशी उमटी गुल भया,मोमन का घर घेर
कोई कहे ब्रह्मा विष्णु है कोई कहे जगदीश
कबीर साहेब को जब नीरू नीमा घर लाए तो काशी के लोग बालक को देखने उमड़ पड़े। कबीर जी का तेज इतना था कि कोई उन्हें देवता स्वरूप कह रहा था कोई ईश्वर स्वरूप कह रहा था। सब परमात्मा का रूप देखकर उन पर मोहित हो रहे थे।
हमारे वेद भी प्रमाणित करते हैं कि पूर्ण परमात्मा ऐसी लीला करता हुआ ही पृथ्वीलोक पर आता है।
👉🏻ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9
परमात्मा शिशु रूप में प्रकट होकर लीला करता है। तब उनकी परवरिश कंवारी गायों के दूध से होती है।
👉🏻ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17
पूर्ण परमात्मा कविर्देव शिशु रूप धारण करके लीला करते हैं। कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी प्राप्त करते हैं।
इन सब बातों से स्पष्ट होता है सर्व सृष्टि के सृजनहार कबीर परमेश्वर ही हैं।
कलयुग में कबीर परमेश्वर अपने वास्तविक नाम कबीर रूप में काशी नगरी में लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर अवतरित हुए।
कबीर परमात्मा सन् 1398, ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी को ब्रह्म मुहूर्त में अपने निज धाम सतलोक से चलकर आए और काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर शिशु रूप धारण करके विराजमान हुए। जहाँ से नीरू-नीमा नामक जुलाहा दम्पति उन्हें उठा कर ले गये और पुत्रवत् पालन किया।
कबीर साहेब जी कहते हैं :-
कबीर, ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।
केवल कबीर परमेश्वर जी ही हैं जिनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ
गरीबदास जी महाराज ने भी अपनी वाणी के द्वारा इसका चित्रण किया है:-
न सतगरु जननी जने, उनके मां न बाप।
पिंड ब्रह्मंड से अगम है, जहां न तीनों ताप।।
जब शिशु रूप में कबीर परमेश्वर को नीरू नीमा घर पर लाए तो उनको देखने के लिए पूरी काशी के लोग उमड़ उमड़ कर आ रहे थे। ऐसा अद्भुत बच्चा उन्होंने आज तक नहीं देखा था। बच्चे का शरीर सफेद बर्फ की तरह चमक रहा था। बालक को देखने के लिए ऊपर से सूक्ष्म रूप में देवता भी आए।
गरीब, गोद लिया मुख चूम करि, हेम रूप झलकंत।
जगर मगर काया करै, दमकै पदम् अनंत।।
गरीब,काशी उमटी गुल भया,मोमन का घर घेर
कोई कहे ब्रह्मा विष्णु है कोई कहे जगदीश
कबीर साहेब को जब नीरू नीमा घर लाए तो काशी के लोग बालक को देखने उमड़ पड़े। कबीर जी का तेज इतना था कि कोई उन्हें देवता स्वरूप कह रहा था कोई ईश्वर स्वरूप कह रहा था। सब परमात्मा का रूप देखकर उन पर मोहित हो रहे थे।
हमारे वेद भी प्रमाणित करते हैं कि पूर्ण परमात्मा ऐसी लीला करता हुआ ही पृथ्वीलोक पर आता है।
👉🏻ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9
परमात्मा शिशु रूप में प्रकट होकर लीला करता है। तब उनकी परवरिश कंवारी गायों के दूध से होती है।
👉🏻ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17
पूर्ण परमात्मा कविर्देव शिशु रूप धारण करके लीला करते हैं। कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी प्राप्त करते हैं।
इन सब बातों से स्पष्ट होता है सर्व सृष्टि के सृजनहार कबीर परमेश्वर ही हैं।
वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज ही हैं जो सही भक्ति विधि बताते हैं
जिससे मुक्ति धाम सतलोक की प्राप्ति हो जाती है। उन्हें समय रहते पहचान लो।
देखिए
👇
साधना Tv 7 :30 pm से
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